In Hindi — Ziyarat E Nahiya
प्रस्तावना (Introduction) इस्लाम के इतिहास में करबला की घटना (घटना-ए-करबला) एक ऐसा दर्दनाक अध्याय है, जिसने हमेशा के लिए सत्य और असत्य के बीच की रेखा खींच दी। हज़रत इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) ने 10 मुहर्रम 61 हिजरी को यज़ीद की सेना के खिलाफ बलिदान देकर इस्लाम की रक्षा की। शिया मुसलमानों के लिए, इमाम हुसैन (अ.स.) से मोहब्बत और उनके मकाम को सलाम करना ईमान का हिस्सा है। इसी कड़ी में, एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भावनात्मक ज़ियारत है - "ज़ियारत-ए-नाहिया" (Ziyarat e Nahiya) ।
"इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलैहे राजेऊन" - हम अल्लाह के हैं और उसी की तरफ लौटना है। सत्य पर बलिदान देने वाले इमाम हुसैन को कोटि-कोटि सलाम। अस्वीकरण: यह लेख शिया इस्लामी मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल धार्मिक जानकारी प्रदान करना है। ziyarat e nahiya in hindi
एक मोमिन के लिए जरूरी है कि वह कम से कम हर रोज़ एक बार इस ज़ियारत की तिलावत करे। यह हमें सिर्फ दुखी नहीं करती, बल्कि इमाम हुसैन (अ.स.) के रास्ते (अम्र बिल मारूफ और नही अनिल मुनकर) पर चलने की ताकत भी देती है। ziyarat e nahiya in hindi
कुछ लोग गलती से इसे 'नाहिया' की बजाय 'नाहिया' (लंबी आवाज के साथ) पढ़ते हैं, जिसका अर्थ "हल्के क्षेत्र" होता है। ध्यान रखें: का अर्थ है - 'तरफ' या 'दिशा', यानि दूर से अरज़ की गई ज़ियारत। निष्कर्ष (Conclusion) ज़ियारत-ए-नाहिया सिर्फ एक दुआ या पाठ नहीं है; यह एक मुहब्बत का पत्र है जो 12वें इमाम (अ.स.) ने अपने नाना इमाम हुसैन (अ.स.) के नाम लिखा। यह हमें सिखाती है कि जुल्म के खिलाफ खड़ा होना ईमान है, और मुहब्बत में रोना इबादत है। ziyarat e nahiya in hindi
यह लेख विशेष रूप से हिंदी भाषी पाठकों के लिए लिखा गया है, ताकि वे ज़ियारत-ए-नाहिया का अर्थ, महत्व, और इसकी फज़ीलत को सरल हिंदी भाषा में समझ सकें। ज़ियारत-ए-नाहिया (अरबी: زیارة الناحية) एक प्रसिद्ध ज़ियारत (सलाम) है जो हमारे 12वें इमाम, हज़रत इमाम मेहदी (अ.स.) ने हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और करबला के शहीदों को संबोधित करते हुए पढ़ी थी। इस ज़ियारत में इमाम हुसैन (अ.स.) की मसीबतों का बयान इतना मार्मिक है कि इसे पढ़ते हुए हर मोमिन की आंखें भर आती हैं।